हमारा मिशन

हमारा मुख्य लक्ष्य परिवर्तन लाना है। जब तक समाज अपने पांव पर खड़ा होना नहीं सीखता है, तब तक परिवर्तन हमेशा सपना बना रहेगा। अतः संगठन नागरिक हितैषी सरकारी योजनाओं और लोगों के अधिकारों के मामले में जागरूकता फैलाने पर ध्यान केंद्रित करने पर विश्वास करता है। संगठन का जन्म अगस्त 2011 में हुए एक आंदोलन से हुआ जिसमंे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रतनौली मंे नरेगा मंे व्याप्त भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया गया था।
भ्रष्टाचार जागरूकता की कमी का स्वाभाविक साथी है: ये दोनो मिलकर समाज को तोड़ते हैं। यही कारण है कि अपने गांव में नरेगा के कामकाज के अनुश्रवण के लिए हमलोगों ने बिहार मनरेगा वाच का आरंभ किया। बाद में समाज परिवर्तन शक्ति संगठन का उद्भव हुआ। संगठन के तहत अधिक गांव और योजनाएं शामिल हैं लेकिन यह भी जागरूकता का प्रसार करने और परिवर्तन लाने के उसी मूल सिद्धांत से अनुप्राणित है।

समाज परिवर्तन शक्ति संगठन की सतत सफलता का कारण हमारे सिद्धांतों का यथार्थ मंे रूपांतरण है: हम जहां भी काम करते हैं, वहां भ्रष्टाचार में कमी आई है। लोग अधिक जागरूक हुए हैं – हम रैली और सभा जैसी पारंपरिक विधियों और सूचना प्रसार के लिए अपनी मोबाइल रेडियो कार्यक्रम जैसी नवाचारी विधियों, दोनो का उपयोग करते हैं।

हमारा अनुभव हमें व्यवस्था संबंधी मुद्दों से संघर्ष मंे नए दृष्टिकोणों को आजमाने की दिशा मंे भी ले गया है। सरकार का संचालन निर्वाचित प्रतिनिधियों और नौकरशाही, दोनो के संश्रय के जरिए किया जाता है। गांव मंे हमारे दैनंदिन जीवन मंे इन दोनो स्तभों का प्रतिनिधित्व क्रमशः मुखिया और पंचायत रोजगार सेवक करते हैं। आरंभ में, हमलोगांे ने अपने अधिकारों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए पंचायत रोजगार सेवकों और उनके उच्चाधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया।

हालांकि, हमें इसका संतोषप्रद परिणाम नहीं मिला। समय के साथ हमें महसूस हुआ कि सारी चीजें मुखिया के हाथों मंे हैं। योजना में लिए जाने वाले निर्णयों के लिए अंतिम रूप से वही जिम्मेवार था और उसी को हमलोगांे ने अपने प्रतिनिधित्व के लिए चुना भी था। नौकरशाही को वही नियंत्रित करता था।

एक पाक-साफ मुखिया मंे नौकरशाहों से लड़ने, व्यवस्था को बदलने और अनेक सरकारी योजनाआंे के लिए सक्षमकारी वातावरण निर्मित करने की संभावनाएं निहित हैं। इसे हमलोगों ने अपने गांवों रतनौली और महंत मनियारी में देखा है जहां याचिकाओं, धरनों और सूचनाधिकार अधिनियम के माध्यम से हमलोगों ने मुखिया पर लगातार दबाव बनाया है। यहां नरेगा का काम अच्छी तरह चल रहा है। काम की मांग का निबंधन वस्तुतः पंचायत रोजगार सेवक द्वारा किया जाता है। काम सही समय पर उपलब्ध कराया जाता है। छोटे-मोटे व्यवधानों के साथ भुगतान भी समय से उपलब्ध हो जाते हैं।

हमारा सपना यह सुनिश्चित करना है कि रतनौली मंे सुलगने वाली चिंगारी पूरे देश को रूपांतरित करे।